Category: Poetry

National Poetry Writing Month, Day 5: शायद इस दीवाली

शायद इस दीवाली करूँगा याद मैं वो झिलमिल गलियाँ, पटाखों का शोर और रौशनी की लड़ियाँ, रहेगी कसक, लेकिन फर्ज़ से ना मुँह मोड़ पाऊँगा शायद इस दिवाली मैं घर...